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Posted by NGL-@utdconfession
मिनटो ं का हिसाब लेकर लौटा था कि अब दिल संभल चुका है, जिस े भुलान े के लिए सब छोड़ े थे, वो कॉलेज के मोड़ प फिर खड़ा है, ये 44 दिन जैस े तैसे काटे थे, पर उस दिन फिर वही पुरान े जख्म हरे हो गए, अजीब सितम है... म ै ं जिसस े दूर भाग रहा हूँ, उस े ये तक नही ं पता कि कोई उसकी एक झलक से आज फिर खुद से हार गया ह
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